होली का त्योहार: रंगों और उल्लास का पर्व,होली का पौराणिक महत्व,होली का सामाजिक संदेश
होली भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे रंगों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है। यह पर्व भाईचारे, प्रेम, और खुशियों का संदेश देता है। हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली होली, बुराई पर अच्छाई की जीत और सर्दी के अंत के साथ वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है
होली का पौराणिक महत्व -
होली का संबंध प्रह्लाद, हिरण्यकश्यप और होलिका की पौराणिक कथा से है। मान्यता है कि अहंकारी राजा हिरण्यकश्यप ने अपने भक्त पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए बहन होलिका की सहायता ली, जिसे वरदान था कि आग उसे जला नहीं सकती। लेकिन जब होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, तो वह खुद जल गई और प्रह्लाद बच गए। तभी से होलिका दहन की परंपरा चली आ रही है, जो बुराई के अंत का प्रतीक है।
होली का उत्सव कैसे मनाया जाता है?
1. होलिका दहन (चोटी होली)
होली से एक दिन पहले लकड़ियों और उपलों का ढेर जलाकर होलिका दहन किया जाता है। लोग अग्नि के चारों ओर घूमते हैं और अपने बुरे विचारों को छोड़ने का संकल्प लेते हैं।
2. रंगों वाली होली (धुलेंडी)
अगले दिन, रंगों और गुलाल से खेलने का सिलसिला शुरू होता है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, पिचकारी से पानी डालते हैं और नाच-गाने का आनंद लेते हैं।
3. भांग और गुझिया का मजा-
होली के मौके पर विशेष पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें गुझिया, मालपुआ, ठंडाई और भांग का खास स्थान होता है।
4. मथुरा-वृंदावन की खास होली-
मथुरा और वृंदावन में लट्ठमार होली, फूलों की होली, और गोपियों की होली देखने लायक होती है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण और राधा की लीलाओं के साथ होली का उत्सव मनाया जाता है।
होली का सामाजिक संदेश-
यह पर्व प्यार, भाईचारे और समानता को बढ़ावा देता है।
होली हमें पुरानी दुश्मनी भूलकर दोस्ती करने की प्रेरणा देती है।
प्रकृति के रंगों से जुड़े इस पर्व पर हमें पर्यावरण के अनुकूल प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करना चाहिए।
निष्कर्ष
होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह मिलन, मस्ती और नई शुरुआत का पर्व भी है। हमें इसे सद्भाव और प्रेम के साथ मनाना चाहिए और दूसरों को भी इस खुशी में शामिल करना चाहिए। तो इस होली, रंगों में घुलें, मिठास बांटें और खुशियों के रंग बिखेरें!
आप सभी को आगामी होली की ढेरों शुभकामनाएँ!
एम. हुसैन डायर, ब्लॉगर & रिपोर्टर, पीपाड़ सिटी, जोधपुर
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