Thursday, February 13, 2025

होली का त्योहार: रंगों और उल्लास का पर्व,होली का पौराणिक महत्व,होली का सामाजिक संदेश


होली का त्योहार: रंगों और उल्लास का पर्व,होली का पौराणिक महत्व,होली का सामाजिक संदेश

होली भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे रंगों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है। यह पर्व भाईचारे, प्रेम, और खुशियों का संदेश देता है। हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली होली, बुराई पर अच्छाई की जीत और सर्दी के अंत के साथ वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है

होली का पौराणिक महत्व -

होली का संबंध प्रह्लाद, हिरण्यकश्यप और होलिका की पौराणिक कथा से है। मान्यता है कि अहंकारी राजा हिरण्यकश्यप ने अपने भक्त पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए बहन होलिका की सहायता ली, जिसे वरदान था कि आग उसे जला नहीं सकती। लेकिन जब होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, तो वह खुद जल गई और प्रह्लाद बच गए। तभी से होलिका दहन की परंपरा चली आ रही है, जो बुराई के अंत का प्रतीक है।

होली का उत्सव कैसे मनाया जाता है?

1. होलिका दहन (चोटी होली)

होली से एक दिन पहले लकड़ियों और उपलों का ढेर जलाकर होलिका दहन किया जाता है। लोग अग्नि के चारों ओर घूमते हैं और अपने बुरे विचारों को छोड़ने का संकल्प लेते हैं।

2. रंगों वाली होली (धुलेंडी)

अगले दिन, रंगों और गुलाल से खेलने का सिलसिला शुरू होता है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, पिचकारी से पानी डालते हैं और नाच-गाने का आनंद लेते हैं।

3. भांग और गुझिया का मजा-

होली के मौके पर विशेष पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें गुझिया, मालपुआ, ठंडाई और भांग का खास स्थान होता है।

4. मथुरा-वृंदावन की खास होली-

मथुरा और वृंदावन में लट्ठमार होली, फूलों की होली, और गोपियों की होली देखने लायक होती है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण और राधा की लीलाओं के साथ होली का उत्सव मनाया जाता है। 

होली का सामाजिक संदेश-

यह पर्व प्यार, भाईचारे और समानता को बढ़ावा देता है।

होली हमें पुरानी दुश्मनी भूलकर दोस्ती करने की प्रेरणा देती है।

प्रकृति के रंगों से जुड़े इस पर्व पर हमें पर्यावरण के अनुकूल प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करना चाहिए।

निष्कर्ष

होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह मिलन, मस्ती और नई शुरुआत का पर्व भी है। हमें इसे सद्भाव और प्रेम के साथ मनाना चाहिए और दूसरों को भी इस खुशी में शामिल करना चाहिए। तो इस होली, रंगों में घुलें, मिठास बांटें और खुशियों के रंग बिखेरें!

आप सभी को आगामी होली की ढेरों शुभकामनाएँ!

एम. हुसैन डायर, ब्लॉगर & रिपोर्टर, पीपाड़ सिटी, जोधपुर 

Sunday, February 2, 2025

बसंत पंचमी का पर्व हमें नए जीवन और ऊर्जा का एहसास कराता है

 क्या आप जानते हैं, बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह खासतौर पर माँ सरस्वती, ज्ञान और कला की देवी की पूजा के लिए मनाया जाता है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है, जो बसंत ऋतु की शुरुआत और खुशियों का प्रतीक है।

बसंत पंचमी का पर्व हमें नए जीवन और ऊर्जा का एहसास कराता है। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते हैं, जो रुखसारों पर खिलते फूलों की तरह होते हैं। बच्चे विद्यालयों में अपनी पहली बार पढ़ाई शुरू करते हैं, इसे 'विद्या आरंभ' कहा जाता है। यह एक अनूठा अवसर है जब माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करते हैं।

इस दिन देवी सरस्वती की पूजा करने के लिए लोग अपने घरों में कलश स्थापित करते हैं और उनके समक्ष फूल, फल और मिठाइयाँ अर्पित करते हैं। संगीत, नृत्य और कला के प्रति हमारी श्रद्धा इस दिन विशेष रूप से देखने को मिलती है। 

बसंत पंचमी का पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह हमारे समाज में कला और संस्कृति के प्रति जागरूकता भी बढ़ाता है। इस दिन स्कूलों और कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जहां छात्र अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। 

तो चलिए, बसंत पंचमी पर हम सब मिलकर ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती से प्रार्थना करें कि वे हमें सच्चे ज्ञान की प्राप्ति कराएं और हमारे जीवन को खुशियों से भर दें। 

Wednesday, October 18, 2023

कैसा होगा घमाशान ? चुनावी चौपाल ( बिलाड़ा विधानसभा क्षेत्र)

एम.हुसैन डायर,ब्लॉगर पीपाड़सिटी।

विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही है। बिलाड़ा विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी ने पूर्व मंत्री अर्जुनलाल गर्ग को अपना प्रत्याशी बनाया है। अब कांग्रेस के पाले में गैंद है कि वह किसे अपना प्रत्याशी बनायेगी। कांग्रेस  के प्रत्याशी पर निर्भर करेगा कि बिलाड़ा विधानसभा का चुनाव सीधा होगा या एक तरफा होगा या त्रिकोणीय मुकाबला होगा। लोगों के व्यूज और अधिकतर लोगों के नजरिये से देखें तो कांग्रेस के वर्तमान विधायक से लोग नाराज नजर आ रहे है। यह बात कितनी सही है या गलत इसका हम दावा नहीं कर सकते। दूसरी और आजादी से लेकर अब तक पीपाड़ क्षेत्र से आज तक कोई विधायक नहीं बना तो इस बार पीपाड़ पंचायत समिति क्षेत्र की जनता यह चाहती है कि हमारे क्षेत्र का कोई जाया जन्मा व्यक्ति विधायक बनें जिसे सीधे शब्दों में कह सकते हैं कि स्थानीय उम्मीदवार हो तो अधिक बेहतर होगा। अब प्रत्याशी कौन होना चाहिए इस पर भी लोगों की अलग-अलग राय है। हालांकि कांग्रेस से लगभग आधे दर्जन से भी अधिक व्यक्ति प्रत्याशी बनने की दौड़ में शामिल है लेकिन कांग्रेस पार्टी किसे मौका देती है यह देखने वाली बात है। उधर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी ताल ठौकने की तैयारी में है। अब तीनों ही दलों से दमदार प्रत्याशी होंगे तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। चुनावी समय है इसलिए शहर एवं गांवो की चैपालों पर अब केवल और केवल चुनाव की ही चर्चा है। कौन-कौन होंगे विभिन्न दलों के प्रत्याशी,कौन जीतेगा,कौन हारेगा,किसके पक्ष में कितने मत पड़ेंगे यह सब भविष्य के गर्भ में है। फिलहाल चर्चा केवल टिकट वितरण के मुद्दें को लेकर है। आगामी काॅलम में हम इसी चर्चा को और आगे बढ़ायेंगे तब तक के लिए जयहिन्द। जय भारत। 

जारी ....

Monday, October 16, 2023

कैसा होगा घमाशान ? चुनावी चौपाल ( बिलाड़ा विधानसभा क्षेत्र)

विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही है। बिलाड़ा विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी ने पूर्व मंत्री अर्जुनलाल गर्ग को अपना प्रत्याशी बनाया है। अब कांग्रेस के पाले में गैंद है कि वह किसे अपना प्रत्याशी बनायेगी। कांग्रेस  के प्रत्याशी पर निर्भर करेगा कि बिलाड़ा विधानसभा का चुनाव सीधा होगा या एक तरफा होगा या त्रिकोणीय मुकाबला होगा। लोगों के व्यूज और अधिकतर लोगों के नजरिये से देखें तो कांग्रेस के वर्तमान विधायक से लोग नाराज नजर आ रहे है। यह बात कितनी सही है या गलत इसका हम दावा नहीं कर सकते। दूसरी और आजादी से लेकर अब तक पीपाड़ क्षेत्र से आज तक कोई विधायक नहीं बना तो इस बार पीपाड़ पंचायत समिति क्षेत्र की जनता यह चाहती है कि हमारे क्षेत्र का कोई जाया जन्मा व्यक्ति विधायक बनें जिसे सीधे शब्दों में कह सकते हैं कि स्थानीय उम्मीदवार हो तो अधिक बेहतर होगा। अब प्रत्याशी कौन होना चाहिए इस पर भी लोगों की अलग-अलग राय है। हालांकि कांग्रेस से लगभग आधे दर्जन से भी अधिक व्यक्ति प्रत्याशी बनने की दौड़ में शामिल है लेकिन कांग्रेस पार्टी किसे मौका देती है यह देखने वाली बात है। उधर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी ताल ठौकने की तैयारी में है। अब तीनों ही दलों से दमदार प्रत्याशी होंगे तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। चुनावी समय है इसलिए शहर एवं गांवो की चैपालों पर अब केवल और केवल चुनाव की ही चर्चा है। कौन-कौन होंगे विभिन्न दलों के प्रत्याशी,कौन जीतेगा,कौन हारेगा,किसके पक्ष में कितने मत पड़ेंगे यह सब भविष्य के गर्भ में है। फिलहाल चर्चा केवल टिकट वितरण के मुद्दें को लेकर है। आगामी काॅलम में हम इसी चर्चा को और आगे बढ़ायेंगे तब तक के लिए जयहिन्द। जय भारत। 

जारी ....

एम.हुसैन डायर,

Beuro chief & ब्लॉगर पीपाड़सिटी।

Friday, July 1, 2022

मुख्यमंत्री का दिया हुआ तोहफा,कबूलने वाला कोई नहीं

पीपाड़ सिटी : पीपाड़ सिटी में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने दूसरे घर का फर्ज निभाते हुए आज से लगभग दो साल पहले जिला अस्पताल बनाने का तोहफा दिया था लेकिन स्थानीय नेताओं की उदासीनता और लापरवाही के चलते जिला अस्पताल को सुविधाओं का समुचित फायदा आज दिन पीपाड़ सहित आस पास के गांवों के लोगों को नहीं मिल सका है। जब तक राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार है तब तक पीपाड़वासियों को कांग्रेस जन कई सुविधाएं उपलब्ध करवा सकते है लेकिन इन नेताओं की उदासीनता ने पीपाड़ वासियों व आस पास के  कई गांवों के लोगों को मुख्यमंत्री द्वारा दी गई जिला अस्पताल की सुविधाओं का लाभ नहीं दिला पा रहे है। पीपाड़ सिटी के वर्तमान हॉस्पिटल की जगह को देखते हुए ही जिला अस्पताल बनाने की घोषणा की गई लेकिन कुछ नेता कम जगह का बहाना बना कर जिला अस्पताल बनाने की प्रक्रिया में रोड़ा बन रहे है। ऐसे नेता हॉस्पिटल बनने की राह में ही रोड़ा नहीं बन रहे है बल्कि पीपाड़ की जनता के राह में कांटे बिखेर रहे है। अगर ऐसे नेताओं की वजह से पीपाड़ जिला अस्पताल बनने से वंचित रह गया तो पीपाड़ की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। अब तक तो हॉस्पिटल में दो चार करोड़ का काम हो चुका होता लेकिन दुर्भाग्य हैं कि अभी तक जिला अस्पताल के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगी है । 
   पीपाड़ की जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर कुंडली मार कर बैठने वाले लोगों से पीपाड़ की जनता हिसाब अगले चुनाव में मांगेगी कि अपने निजी स्वार्थ के चक्कर में उनके अधिकारों को क्यों छीना। 
  अब भी समय है जाग जाओ और पीपाड़ की जनता को उनका हक दिलाने के लिए आगे आ जाओ अन्यथा कुछ समय बाद आपके हाथ में भी कुछ नहीं रहेगा सिवाय पछताने के। 
  पीपाड़ की जनता भी कुछ हद तक जिम्मेदार है काम नहीं होने के पीछे। क्योंकि जो कोई भी व्यक्ति उनके हक के लिए लड़ता है पीपाड़ की जनता खुल कर उनका साथ नहीं देती है,केवल मूक दर्शक बन कर देखती रहती है कि आगे क्या होगा। अरे पीपाड़ के कर्ण धारों जागो पार्टी पॉलिटिक्स छोड़ों और अपने हक और अधिकारों के लिए लड़ों तभी इस  पीपाड़ शहर से जुड़े दर्जनों गांवों  के लोगों का कुछ भला हो सकता है अन्यथा समय रूपी सांप निकल जायेगा और हम लकीर पीटते ही रह जायेंगे। 
  अब इतना ही फिर कुछ खट्टा मीठा अगले ब्लॉग में तब तक के लिए जय हिंद,जय भारत। 
      
 मोहम्मद हुसैन डायर
 रिपोर्टर एंड ब्लॉगर
 पीपाड़ सिटी (जोधपुर)